गाँव से शिक्षा

गाँव की शिक्षा कैसी हो — स्कूल और समाज के बीच का जीवंत संवाद

हमारी मौलिक चिंता

आज की प्रचलित शिक्षा व्यवस्था में गाँव की कोई जगह नहीं बची है। पाठ्यपुस्तकों में केवल शहरी जीवन, विदेशी तकनीक और दूर-दराज के उदाहरण होते हैं।

लेकिन जो बच्चा बचपन से खेत देखता है, बैलों को हाँकना सीखता है, गोपण से पक्षियों को पहचानता है, जंगल की जड़ी-बूटियों के बीच बड़ा होता है — उसे अपनी माटी और संस्कृति की कोई प्रामाणिक शिक्षा स्कूल में नहीं मिलती।

परिणाम यह होता है कि वर्तमान पढ़ाई बच्चे को अपने ही गाँव, माता-पिता और संस्कृति से हीन भावना से भर देती है। ग्रामगुरुकुल प्रकाशन इस खाई को पाटने का संकल्प है।
झाबुआ का बालक पारंपरिक गोपण के साथ — प्रकृति से सीखने की सहज कला
गोपण और प्रकृति: गाँव का बाल जीवन सहज ज्ञान से परिपूर्ण है

"मेरा जिला" — भाग 1

कक्षा 6 के लिए झाबुआ ज़िले पर आधारित सामाजिक विज्ञान

मेरा जिला — भाग 1

निर्माणाधीन पाठ्यपुस्तक

यह पाठ्यपुस्तक कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए झाबुआ ज़िले के भूगोल, इतिहास, संस्कृति और ग्राम-व्यवस्था पर आधारित है। इसमें बच्चे अपने परिवार, बड़वा, तड़वी, समाज, परंपराएँ, खेत, नदी-तालाब, पशु और त्योहारों के माध्यम से सामाजिक विज्ञान सीखते हैं।

यह पुस्तक क्यों आवश्यक है?

स्थानीय परिवेश से जुड़ाव

बच्चे अपने गाँव और नदियों के उदाहरणों से अवधारणाएँ जल्दी समझते हैं।

माटी का गौरव

गाँव के काम और कृषि कौशल के प्रति हीन भावना समाप्त होती है।

स्थानीय भीली शब्दों का समावेश

मातृभाषा से मानक हिंदी तक की स्वाभाविक यात्रा।

परंपरा व विज्ञान का समन्वय

हलमा और पारंपरिक जल-संरक्षण को आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से समझना।

गाँव के जीवन में समाया अनौपचारिक ज्ञान

वे हुनर और संस्कार जो किसी स्कूल में नहीं, बल्कि गाँव की चौपाल और खेतों में सीखे जाते हैं

हल चलाना

खेती की कला और मिट्टी की तासीर का ज्ञान

देसी बीज संग्रह

देसी बीजों को पहचानना और संरक्षित करना

पशुपालन व गोसेवा

पशुओं की भाषा, देखभाल और पालन-पोषण

पारंपरिक आयुर्वेद

जंगलों की जड़ी-बूटियाँ और घरेलू उपचार

काष्ठ शिल्प

लकड़ी से कृषि उपकरण, तीर-कमान व घरेलू साधन

मिट्टी-खपरैल निर्माण

पर्यावरण-अनुकूल पारंपरिक घर निर्माण

गोपण निर्माण व कला

हाथ से बुनी जाने वाली पारंपरिक गोपण (गुलेल)

गाँव की पंच व्यवस्था

तड़वी, बड़वा और कोटवाल की न्याय प्रणाली